राजस्थान विधानसभा चुनाव : क्या सत्ता विरोधी लहर वसुंधरा राजे की होगी नय्या पार?

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राजस्थान की दो बार मुख्यमंत्री रह चुकीं वसुंधरा राजे की अगुवाई में ही भाजपा विधानसभा चुनाव लड़ रही है। राजे पर राजस्थान की सत्ता में वापसी न होने का 25 साल पुराना मिथक तोड़ने का दारोमदार है, लेकिन सत्ता विरोधी लहर की वजह से उनकी राह आसान नहीं दिख रही है। राजस्थान के पिछले रुख के हिसाब से उनकी वापसी की राह आसान नहीं दिखती।

राजे रखती है राजघराने से ताल्लुक

वसुंधरा राजे का जन्म आठ मार्च 1953 को मुंबई में हुआ था। उनके पिता जीवाजीराव सिन्धिया ग्वालियर के शासक थे और मां का नाम विजयाराज सिंधिया भाजपा की बड़ी नेता थीं। वे मध्य प्रदेश के कद्दावर कांग्रेस नेता स्वर्गीय माधव राव सिंधिया की बहन और ज्योतिरादित्य सिंधिया की बुआ हैं। उनका विवाह धौलपुर के एक जाट राजघराने में हेमंत सिंह के साथ हुआ। वहीं उनके सांसद पुत्र दुष्यंत सिंह का विवाह गुर्जर राजघराने में निहारिका सिंह के साथ हुआ है।

सियासत में किस्मत रहती है मेहरबान

वर्ष 1985 में वसुंधरा पहली बार राजस्थान विधानसभा की सदस्य धौलपुर से चुनी गईं। 1998-99 में केंद्र में विदेश राज्य मंत्री भी रहीं। वसुंधरा राजे के सियासी सफरनामे में किस्मत ने उनका बहुत साथ दिया। 2003 में जब राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने को थे तो राज्य के दो शीर्ष नेता केंद्र में जा चुके थे। भैरो सिंह शेखावत जहां उप राष्ट्रपति बन चुके थे तो जसवंत सिंह केंद्रीय मंत्री थे। ऐसे में भाजपा ने वसुंधरा को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर उनकी अगुवाई में राजस्थान में चुनाव लड़ने का फैसला किया।

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मुखर महिला नेता

2003 में राजस्थान में भाजपा 110 सीटें जीतकर सत्ता में आई। बेहद मुखर राजनेता वसुंधरा एक दिसंबर 2003 को राजस्थान की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं। इसे वसुंधरा राजे का ही कमाल माना गया। 2008 के चुनाव में हार के बाद वसुंधरा नेता प्रतिपक्ष बनीं। 2009 के लोकसभा चुनाव में वसुंधरा के रहते पार्टी को 25  लोकसभा सीटों में से महज चार पर जीत मिली, इसके बाद वसुंधरा को नेता प्रतिपक्ष का पद भी छोड़ना पड़ा। मगर 2013 में पार्टी को फिर प्रचंड बहुमत मिला और वह मुख्यमंत्री बनीं।

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राजे सरकार ने लोककल्याणकारी योजनाएं चलाईं

मुख्यमंत्री रहने के दौरान वसुंधरा ने राज्य में ‘अक्षय कलेवा’, ‘मिड-डे-मील योजना’, ‘पन्नाधाय’, ‘भामाशाह योजना’ एवं ‘हाडी रानी बटालियन’  और ‘महिला सशक्तीकरण’ जैसी योजनाएं चलाईं। दूसरे कार्यकाल में वसुंधरा ने अन्नपूर्णा योजना चलाई जिसके तहत शहरों में लोगों को 5 रुपये में नास्ता और 8 रुपये में भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।

इस बार भी झालरापाटन से मैदान में

वसुंधरा 2003 से लगातार राजस्थान विधान सभा चुनाव में झालावाड़ जिले के झालरापाटन विधानसभा से चुनी जा रही हैं। वे एक बार फिर सीट से चुनाव मैदान में हैं।

घुड़सवारी और संगीत का शौक रखती है महारानी

वसुंधरा की शिक्षा सोफिया कॉलेज मुंबई में हुई है। उन्हें घुड़सवारी, फोटोग्राफी, संगीत और बागवानी का शौक रहा है।

सचिन पायलट बोले- क्या मुस्लिम उम्मीदवार युनूस खान के लिए वोट मांगने आएंगे योगी आदित्यनाथ

राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 में बीजेपी ने राज्य में एक मात्र मुस्लिम उम्मीदवार टोंक से कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट के खिलाफ उतारा है। संभावित मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार पायलट ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए पूछा है कि क्या वह टोंक से अपनी पार्टी के उम्मीदवार यूनुस खान के लिए वोट मांगने आएंगे।

बुधवार को पूरे दिन नौ पंचायतों और शहर में चुनाव प्रचार के दौरान पायलट ने भाजपा पर धर्म और जाति के नाम राजनीति करने का आरोप लगाया। टोंक में अपने हर भाषण के दौरान सचिन पायलट ने युनुस खान के साथ चुनावी लड़ाई को व्यक्तिगत की जगह विचारधारा की लड़ाई बताया। पायलट ने कहा कि यूपी के मुख्यमंत्री राज्य के अलग अलग हिस्सों में प्रचार के लिए जा रहे हैं, क्या वो यहां भी आएंगे।