नीरजा भनोट की कहानी का सच आपको रुला देगा, खुद की जान की परवाह किये बिना बचाई 360 ज़िंदगियां !

महिलाओ में साहस की बात की जाए तो वो महिलाओ में किसी से कम नहीं, महिला माँ का रूप देवी का रूप होती है अगर एक महिला देवी बन सकती है तो चंडी बनकर किसी भी परेशानी का सामना बखूबी कर सकती है।आज हम बात करने वाले है एक ऐसी महिला के बारे में जिसको कौन नहीं जानता उन्होंने अपने साहस से 360 लोगो की जान बचाई है, बिना डरे वो खड़ी रही अपनी जान की पहवाह न करे बस डटी रही और सामना किया आतंकियों का।

साहस की कहानी भारत के इतिहास में हमेशा याद रखी जाएगी

आतंकियों के सामने साहस से खड़े होने का जज्बा देश के सिपाहियों और सैन्य अधिकारियों में होता है, जिसे इसके लिए ट्रेंड किया जाता है लेकिन एक साधारण महिला का सामना जब हथियारबंद आतंकियों से हो जाए और वह अपनी जान की परवाह किए बिना सैकड़ों जिंदगियों को बचाने की कोशिश करने लगे, तो वह कोई साधारण महिला नहीं, बल्कि एक साहसी सिपाही बन जाती है। ऐसी ही एक महिला और उसके साहस की कहानी भारत के इतिहास में हमेशा याद रखी जाएगी। इस महिला का नाम नीरजा भनोट था। नीरजा भनोट कोई सैन्य कर्मचारी नहीं, न ही भारतीय रक्षा मंत्रालय में शामिल थीं।

खुद का जान दांव पर लगाकर 360 लोगों की जान बचाई

उन्होंने कोई सैन्य ट्रेनिंग नहीं ली थी लेकिन जब 1986 को भारत का प्लेन हाईजैक हुआ तो नीरजा ने आतंकियों का सामना डटकर किया और खुद का जान दांव पर लगाकर 360 लोगों की जान बचाई। नीरजा भनोट के जीवन को बड़े पर्दे पर फिल्म के रूप में भी उतारा जा चुका है। इस लेख के माध्यम से नीरजा भनोट के जन्मदिन के मौके पर उनके उस साहस की कहानी को याद करते हैं और उनकी बहादुरी को सलाम करते हैं। नीरजा भनोट अशोक चक्र से सम्मानित पहली महिला हैं। उन्होंने 5 सितंबर 1986 में हुए प्लेन हाईजैक में बहादुरी का परिचय देते हुए सैकड़ों लोगों की जान बचाई थी। नीरजा भनोट का जन्म पंजाबी परिवार में 7 सितंबर 1963 को हुआ था। बचपन चंडीगढ़ में बीता, वहीं के सैक्रेड हार्ट सीनियर सेकेंडरी स्कूल से उन्होंने शुरुआती शिक्षा हासिल की। बाद में पूरे परिवार के साथ मुंबई शिफ्ट हो गईं।

नीरजा को रोक टोक और दबाव की जिंदगी स्वीकार नहीं थी

नीरजा ने मुंबई के सेंट जेवियर कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। वह खुले ख्यालों की महिला थीं। 17 साल की नीरजा को रोक टोक और दबाव की जिंदगी स्वीकार नहीं थी। उन्हें मॉडलिंग का शौक था। 1985 में उनकी एक उद्यमी से शादी करा दी गईं लेकिन पति संग रिश्ते ठीक न होने के कारण वह शादी के दो महीने बाद ही उन से अलग हो गईं। इसके बाद उन्होंने मॉडलिंग शुरू की और करीब 22 विज्ञापनों में काम किया। वह बचपन से प्लेन में बैठने और आकाश में उड़ने के सपने देखती थीं।

पूरे विमान को हाईजैक कर लिया और यात्रियों को गन प्वाइंट पर ले लिया

मॉडलिंग का शौक पूरा करने के बाद उन्होंने एयरलाइंस ज्वाइन कर ली। ट्रेनिंग के लिए नीरजा फ्लोरिडा और मयामी गईं। . जन्मदिन से दो दिन पहले 1986 में नीरजा मुंबई से अमेरिका जाने वाली फ्लाइट में बतौर सीनियर एटेंडेंट शामिल थीं। इस दौरान कराची से उड़ान भरने से पहले चार आतंकियों ने पूरे विमान को हाईजैक कर लिया और यात्रियों को गन प्वाइंट पर ले लिया। लेकिन उस रात नीरजा ने अपनी सूझबूझ से विमान का दरवाजा खोल दिया और सभी यात्रियों की जान बचाई। इस दौरान 5 सितंबर 1986 को आंतकियों की फायरिंग में नीरजा शहीद हो गईं।

ऐसी ही होती है महिलाओ की कहानी

इस महिला के जज्बे को हम सब सलाम करते है अगर उस दिन नीरजा वो दम वो साहस से आतंकियों का सामना नहीं करती तो वो 360 लोग अपनी जान गवा बढ़ते, आज अपनी जान की खत्म करके उन सब परिवारों में खुशिया भर दी ऐसी ही होती है महिलाओ की कहानी, हमारे अंदर कुछ करने की ना डरने की उम्मीद सी भर देती है.

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