सड़कों पर झाड़ू लगाकर देखा सपना, कड़ी मेहनत और जुनून से पाया लक्ष्य

आशा कंडारा एक ऐसा नाम है जिसके संघर्ष की कहानी ना सिर्फ राजस्थान साथ ही पूरे देश के उन युवाओं के लिए एक प्रेरणा है जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं. जोधपुर की सड़कों पर झाड़ू निकालते हुए आशा कंडारा ने एक सपना देखा और इस सपने को आशा ने पूरा भी किया. शिखर पर पहुंचने के सफर में आज हम बात करने जा रहे आशा कंडारा के संघर्ष की कहानी की.

सफाई कर्मचारी से आरएएस बनने तक का सफर किया तय

जोधपुर के मोहल्ला बड़वासिया में रहने वाली आशा के मन में बचपन से ही कुछ कर गुजरने की इच्छा पैदा कर ली थी. लेकिन शादी होने के चलते आशा अपने सपनों को पूरा नहीं कर पाई. पति से तलाक होने के बाद आशा ने अपना पूरा ध्यान पढ़ाई पर केन्द्रित कर दिया था. तलाक के बाद पहले आशा ने ग्रेजुएशन की ओर उसके बाद आरएएस की तैयारी में जुट गई. आरएएस की परीक्षा देने से पहले आशा ने सफाई कर्मचारी भर्ती परीक्षा दी थी जिसमें आशा का चयन हुआ था और आरएएस परीक्षा देने के 12 दिन बाद ही आशा ने कर्मचारी सफाई के पद पर पदभार ग्रहण किया. सफाई कर्मचारी भर्ती 2018 में आशा का चयन होने के बाद उन्होंने ज्वाइन किया और जोधपुर की सड़कों पर झाड़ू भी लगाई.

पति से हुआ तलाक, तलाक के बाद जुड़ी पढ़ाई में

आशा कंडारा की शादी जोधपुर के रहने वाले व्यक्ति से 1997 में हुई.लेकिन आशा की शादी के बाद पति से ज्यादा कुछ खास पटरी नहीं बैठी. लगातार हो रहे विवाद के चलते शादी के 8 साल बाद आखिरकार आशा ने पति से अलग होने का फैसला लिया. तलाक के बाद आशा के ऊपर अपने दो बच्चों की जिम्मेदारी आ गई थी. लेकिन अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हुए आशा ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और साल 2021 में अपने लक्ष्य को प्राप्त किया.

कोई काम नहीं होता है छोटा

आशा के पिता राजेन्द्र कंडारा लेखा सेवा से रिटायर हुए थे. इसके बाद आशा द्वारा सफाई कर्मचारी के पद पर कार्य करने को लेकर भी कई सवाल खड़े हुए थे. लेकिन सफलता प्राप्त करने वाली आशा ने बताया कि कोई भी काम छोटा नहीं होता है. काम काम होता है और अपने काम को पूरे मन से करना चाहिए.

जहां काम किया वहीं की महापौर ने किया सम्मानित

आशा कंडारा जब सफाई कर्मचारी के पद पर कार्यरत थी. तो उसी समय आरएएस भर्ती 2021 का परिणाम जारी हुआ. परिणाम में आशा ने करीब 700वीं रैंक हासिल की. आशा की सफलता से ना सिर्फ उनके परिवार साथ ही नगर निगम में भी खुशी का माहौल था. जिस नगर निगम में आशा काम करती थी वहीं ही महापौर ने सफलता के बाद आशा कंडारा को सम्मानित किया.

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