एनटीटी अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री से लगाई गुहार, मुख्यमंत्री आवास जाकर सौंपा ज्ञापन

एनटीटी संघर्ष समिति की ओर से अपनी मांग को लेकर अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से गुहार लगाई गई है. पिछले करीब 5 सालों से नियुक्ति के लिए संघर्ष कर रहे एनटीटी अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री आवास जाकर मुख्यमंत्री से गुहार लगाई. साथ ही प्रदेश के योग्य युवा नौजवानों के हितों में फैसले लेने की मांग की. संघर्ष समिति के प्रदेश महासचिव विष्णु शर्मा के नेतृत्व में प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात कर अपनी बात रखी

नियमों की अनदेखी कर नियुक्ति देने के लगाए आरोप

एनटीटी संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल ने एनटीटी भर्ती 2018 की विभिन्न समस्याओं का समाधान करके जल्द भर्ती को पूरा करने साथ ही योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की मांग रखी.  एनटीटी संघर्ष समिति ने बताया कि एनटीटी भर्ती 2018 में महिला एवं बाल विकास विभाग ने भर्ती नियमों की अनदेखी करते हुए निजी कॉलेज गीता बजाज मोती डूंगरी जयपुर 53 अभ्यर्थियों को गलत तरीके से नियुक्ति दे दी गई जो की ( एनसीटीई ) से एनटीटी है ही नहीं. जो कि प्री प्राइमरी कोर्स है. जो एनटीटी के समकक्ष भी नहीं है. गीता बजाज कॉलेज के 53 अभ्यार्थियों को आधार बनाकर अन्य राज्य के अपात्र अभ्यर्थी भर्ती में प्रवेश कर रहे हैं महिला एवं बाल विकास विभाग की इस गलती के कारण राजस्थान के पात्र एनटीटी अभ्यर्थी बाहर हो रहे हैं. इसलिए गीता बजाज के अभ्यर्थी को इस भर्ती प्रक्रिया से बाहर किया जाए या फिर उनके लिए अलग से अतिरिक्त पद सृजित करे.

बंद हो चुका है एनटीटी कोर्स,ऐसे में भविष्य में नहीं कोई संभावना

एनटीटी अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से गुहार लगाते हुए कहा कि एनटीटी कोर्स 2011 में बंद होने के कारण नई भर्ती आने की संभावना नहीं है. राजस्थान में TSP अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं है. करीब 200 से ज्यादा पद रिक्त पड़े हैं. इसलिए इन सीटों को नॉन TSP से भरा जा. 2012 से रिक्त चली आ रही है कोर्स बंद होने के कारण आगे भविष्य में एनटीटी अभ्यर्थी TSP मे नहीं मिलेंगे. नॉन TSP में सीटों को भरने से राज्य के बेरोजगार अभ्यर्थियों को रोजगार मिल सकेगा.

839 पदों पर दी जा चुकी है नियुक्ति

एनटीटी भर्ती 2018 में 839 को नियुक्ति दी जा चुकी है. साथ ही शेष अभ्यर्थियों की सत्यापित जांच एक साथ ही करवाने की मांग की जा रही है. जिससे विभाग को दस्तावेज जांच हेतु बार-बार सूची जारी नहीं करनी पड़े. इसके साथ ही भर्ती समय पर पूरी हो सके. 

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