‘BJP ने जुआ खिलवाने वाली कंपनियों से चंदा लिया…’, इलेक्टोरल बॉन्ड मामले में पूर्व CM गहलोत ने साधा निशाना; ED के लिए कही बड़ी बात

चौक टीम, जयपुर। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर चुनाव आयोग ने इलेक्टोरल बॉन्ड पर एसबीआई से मिली जानकारी को सार्वजनिक कर दिया है। आयोग ने अपनी वेबसाइट पर एसबीआई से मिले चुनावी चंदे के डेटा को गुरुवार को अपलोड कर दिया। इसके बाद विपक्षी पार्टियों ने भाजपा पर जमकर निशाना साधना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में राजस्थान के पूर्व CM अशोक गहलोत ने भी भाजपा को देश की सबसे भ्रष्ट पार्टी बताया है।

भाजपा देश की सबसे भ्रष्ट पार्टी- पूर्व CM

पूर्व CM अशोक गहलोत ने भाजपा पर निशाना साधते हुए अपने X हैंडल पर लिखा कि, “इलेक्टोरल बॉन्ड का डाटा सार्वजनिक होने के बाद भारतीय जनता पार्टी द्वारा मचाई गई लूट देश के सामने आ गई है। इलेक्टोरल बॉन्ड की जानकारी से तो ऐसा लगता है कि ED भाजपा का एक्सटोर्सन डिपार्टमेंट बनकर रह गई है। जिन कंपनियों पर केन्द्रीय एजेंसियों ने छापे मारे, उन्होंने ही भाजपा को इलेक्टोरल बॉन्ड से चंदा दिया और उन पर चल रही कार्रवाई रुक गईं।”

उन्होंने कहा कि भाजपा ने सट्टेबाजी, जुआ आदि का काम करने वाली कंपनियों तक से चंदा लिया है। ये ही भाजपा के चरित्र का सत्यापन है। कांग्रेस शुरू से कह रहे थी कि इलेक्टोरल बॉन्ड देश का सबसे बड़ा घोटाला है। अब ये देश के सामने आ गया है कि भाजपा देश की सबसे भ्रष्ट पार्टी है जिसने भ्रष्टाचार का सरकारीकरण कर दिया है। ऐसा पहली बार देखा गया है कि जो कंपनियां घाटे में चल रही हैं वो भी करोड़ों का चंदा भाजपा को दे रही हैं।

भाजपा के दबाव में मीडिया भी इलेक्टोरल बॉन्ड के मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं दिखा रही है। यह एक लोकतंत्र में उचित नहीं है कि जनता को सच्चाई ही ना बताई जाए और गुमराह किया जाए। भाजपा का ये भ्रष्टाचार अब कैसे भी नहीं छिप सकता है।

चुनावी बान्ड संख्या का भी खुलासा करना होगा- SC

दरअसल, मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने अपने रजिस्ट्रार (न्यायिक) को मतदान पैनल द्वारा सीलबंद लिफाफे में दाखिल किए गए डेटा को स्कैन और डिजिटाइज किए जाने के बाद मूल दस्तावेज चुनाव आयोग को वापस करने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को स्पष्ट रूप से कहा कि भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को बान्ड की खरीद और भुनाने के संबंध में पहले से बताए गए विवरणों के अलावा, चुनावी बान्ड संख्या यानी यूनिक नम्बर का भी खुलासा करना होगा।

चुनावी बॉन्ड पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछे सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ईसी में अपलोड करने के लिए डेटा जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि बॉन्ड नंबरों से पता चल सकेगा कि किस दानदाता ने किस पार्टी को चंदा दिया। अब मामले में अगली सुनवाई सोमवार को यानी कि 18 मार्च को होगी। पहले इस मामले पर आज ही सुनवाई होनी थी और इसकी लाइव स्ट्रीमिंग भी की जानी थी। लेकिन अब सोमवार को मामले पर सुनवाई होगी।

सुनवाई के दौरान, पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से मामले में पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और वकील प्रशांत भूषण की दलीलों पर ध्यान दिया कि एसबीआई द्वारा चुनावी बॉन्ड के अल्फा-न्यूमेरिक नंबरों का खुलासा नहीं किया गया है। बता दें कि पीठ में न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति बी आर गवई, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल थे।

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