नागौर से विधायकी हारने के बावजूद BJP ने ज्योति मिर्धा को दिया टिकट, क्या चलेगा ये दांव या बेनीवाल फैक्टर फिर से लगाएगा अड़ंगा?

चौक टीम, जयपुर। भाजपा ने शनिवार को लोकसभा चुनाव के लिए 195 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की। इसमें राजस्थान की 15 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा की गई है। कोटा से ओम बिड़ला, जोधरपुर से गजेन्द्र सिंह शेखावत, बीकानेर से अर्जुन मेघवाल, नागौर से ज्योति मिर्धा और बांसवाड़ा से महेंद्रजीत सिंह मालवीय भी शामिल हैं। बता दें ज्योति मिर्धा पिछले साल विधानसभा चुनाव हार गई थीं। लेकिन भाजपा आलाकमान ने फिर से भरोसा जताया है। ज्योति मिर्धा के मैदान में उतरने के बाद इस सीट पर चुनाव रोमांचक हो गया है।

हालांकि, ज्योति मिर्धा की राह इस बार आसान नहीं रहने वाली है। क्योंकि इस सीट के जातिगत समीकरण और हनुमान बेनीवाल इस बार के चुनावों में भाजपा को कड़ी टक्कर दे सकते हैं। आपको बता दें ज्योति मिर्धा लंबे समय से कांग्रेस से जुड़ीं रहीं हैं। ज्योति मिर्धा ने 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को यह कहकर छोड़ दिया था कि उन्हें पार्टी में घुटन होती है। और ठीक विधानसभा चुनाव से पहले ज्योति मिर्धा ने भाजपा ज्वाइन कर ली थी। इसके बाद भाजपा ने ज्योति मिर्धा को नागौर से विधायकी लड़वाई और फिर प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया…अब नागौर लोकसभा सीट से ही अपना प्रत्याशी बनाया है।

विधानसभा चुनाव में मिली थी हार

बता दें कि 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने ज्योति मिर्धा को नागौर से अपना प्रत्याशी उतारा था। उस समय ज्योति मिर्धा कांग्रेस पार्टी को छोड़कर भाजपा में शामिल हुईं थीं। कांग्रेस ने ज्योति मिर्धा के सामने उनके ही चाचा हरेंद्र मिर्धा को उतार मैदान में उतार दिया था। लोगों की सहानुभूति से हरेंद्र मिर्धा विधानसभा 2023 का चुनाव जीत गए और ज्योति मिर्धा अपने ही चाचा के सामने चुनाव हार गईं थीं।

क्या नागौर में फिर अड़ंगा लगाएगा बेनीवाल फैक्टर?

गौरतलब है कि ज्योति मिर्धा को नागौर लोकसभा सीट से बीजेपी ने मैदान में उतार दिया है। इसके बाद अब सभी की निगाहें रालोपा प्रमुख हनुमान बेनीवाल के कदम पर टिकी हुई है। राजनीति के जानकारों की मानें तो इस सीट यदि बेनीवाल चुनाव मैदान में उतरे तो चुनाव काफी रोमांचक बन जाएगा। क्योंकि 2019 के लोकसभा चुनाव में नागौर से NDA उम्मीदवार के तौर पर हनुमान बेनीवाल ने कांग्रेस से आई ज्योति मिर्धा को करीब 2 लाख वोटों से हराया था।

इसके बाद हनु्मान बेनीवाल के किसान आंदोलन के समर्थन में आने के चलते 2020 में गठबंधन टूट गया और अब बीजेपी ने वहां प्रत्याशी उतार कर वापसी के सारे रास्ते बंद कर दिए। अब जाटों के दबदबे वाली इस सीट पर बीजेपी ने जाट चेहरा उतारा है ऐसे में अब कांग्रेस और बेनीवाल पर नज़रें टिकी हैं।

बता दें 2014 में मोदी लहर में सीआर चौधरी जीते, बेनीवाल के निर्दलीय होने से जाट वोट बंट गए, ज्योति को नुकसान हुआ। 2014 में नागौर में 59.8 फीसदी मतदान हुआ जिसमें से बीजेपी को 41.3 फीसदी और कांग्रेस को 33.8 फीसदी वोट मिले, जबकि 15.9 फीसदी वोट के साथ निर्दलीय हनुमान बेनिवाल तीसरे नंबर रहें।

वहीं नागौर संसदीय सीट पर हुए चुनाव के आंकड़ें देखें तो यहां ज्यादातर आमने-सामने की फाइट हुई है। यहां हारने और जीतने वाले प्रत्याशी के अलावा अन्य की जमानत सी जब्त हुई। 1997 के उपचुनाव में बीजेपी पहली बार जीती और इसके बाद 2004 में बीजेपी विधायक भंवरसिंह डांगावास ने वहां कमल खिलाया था।

इस सीट पर मिर्धा परिवार का रहा है दबदबा

नागौर लोकसभा सीट की बात करें तो नागौर लोकसभा सीट पर मिर्धा परिवार का दबदबा रहा है। बताया जा रहा है कि मिर्धा परिवार नागौर लोकसभा क्षेत्र के ग्रामीणों आंचल के किसान मिर्धा परिवार को ज्यादा पसंद करते हैं। नागौर की लोकसभा सीट लंबे समय से मिर्धा परिवार के कब्जे में रही. मिर्धा परिवार से नाथूराम मिर्धा, रामनिवास मिर्धा, भानूप्रकाश मिर्धा के साथ ज्योति मिर्धा भी लोकसभा चुनाव जीत चुकी है। चार दशक तक इस नागौर लोकसभा सीट पर मिर्धा परिवार का कब्जा रहा है।

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