दिल्ली बना रेप का गढ़! रोजाना 2 लड़कियां होती है रेप का शिकार?

भारत के अलग-अलग हिस्सों के लोग दिल्ली में शिक्षा और रोजगार जैसे मकसद से आते हैं। बावजूद इसके दिल्ली की सड़के बहुत असुरक्षित हैं। ऐसा हम नहीं बल्कि हाल ही में जारी हुए आंकड़ों का कहना है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में रोजाना 2 लड़कियां रेप का शिकार होती हैं।

2020 में महिलाओं के साथ अपराध के कुल 9,872 मामले दर्ज किए गए थे

आइए जानते हैं ताजा रिपोर्ट में सामने आए आंकड़ों के बारे में। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक दिल्ली में महिलाओं के साथ होने वाले अपराध 40 प्रतिशत बढ़ गए हैं। 2020 में महिलाओं के साथ अपराध के कुल 9,872 मामले दर्ज किए गए थे। वहीं 2021 में मामलों की संख्या बढ़कर 13,892 हो गई है। मेट्रो शहरों में होने वाले अपराधों में दिल्ली के साथ-साथ मुबंई, बेंगलुरु, हैदराबाद, जयपुर और लखनऊ का भी नाम शामिल हैं। आइये जानते है जानें मेट्रो शहरों में दर्ज मामलों की संख्या दिल्ली – 13, 987 मुंबई – 5,543 बेंगलुरु- 3,127 हैदराबाद – 3,050 जयपुर – 2,827 लखनऊ – 2,161

नाबालिग बच्चियों से साथ दुष्कर्म के कुल 833 मामले दर्ज किए गए

वही दिल्ली में होते हैं सबसे ज्यादा अपराध जी हां देश की राजधानी में महिलाओं के खिलाफ अपराध के सबसे ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं। पिछले साल दिल्ली में अपहरण के 3948, पतियों की क्रूरता के 4674 और नाबालिग बच्चियों से साथ दुष्कर्म के कुल 833 मामले दर्ज किए गए हैं। इन आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में रोजाना 2 लड़कियों के साथ रेप की घटना घटती है। दिल्ली में हत्या के मामले में मामूली सी गिरावट देखने को मिली है। 2020 में हत्या के 461 मामले और 2021 में 454 सामने आए हैं।

महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध में 23% वृद्धि

वहीं 2020 में हत्या के 500 मामले दर्ज किए गए थे। इस मामले के पीछे की वजह संपत्ति से जुड़े विवाद, परिवार से जुड़े विवाद और प्रेम प्रसंग जैसे कारण शामिल हैं। एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक ओडिशा में भी महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध में 23% वृद्धि हुई है। राज्य में प्रति एक लाख महिलाओं की अपराध दर बढ़कर 137.8 हो गई है। 2020 में यह दर 112.9 थी। एनसीआरबी की हाल ही में ‘क्राइम इन इंडिया 2021’ नाम से रिपोर्ट प्रकाशित की है। इसी रिपोर्ट में यह सारी जानकारी दी गई है। आंकड़े साफ दिखाते हैं कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए अभी भारत को बहुत काम करने की आवश्यकता है।

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