करीम टूंडा के खिलाफ CBI नहीं पेश कर पाई सबूत, अजमेर की TADA कोर्ट ने किया बरी; जानिए पूरा मामला

चौक टीम, अजमेर। साल 1993 में हुए सिलसिलेवार बम धमाके को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है। अदालत ने इस धमाके के आरोपी अब्दुल करीम टुंडा को बरी कर दिया है। अजमेर की TADA कोर्ट ने अब्दुल करीम टुंडा को किसी भी मामले में दोषी नहीं पाया है। अजमेर की टाडा कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है। बता दें धमाके के करीब 31 साल बाद सभी को अदालत के फैसले का इंताजर था। अब अदालत ने अब्दुल करीम टुंडा को बरी कर दिया है। इसी के साथ टाडा कोर्ट ने इरफान और हमीदुद्दीन को दोषी करार दिया है, और उम्रकैद की सजा सुनाई है।

बता दें अब्दुल करीम टुंडा के खिलाफ यह मामला साल 2014 से विचाराधीन था। इस मामले में टुंडा सहित करीब 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। अजमेर की टाडा कोर्ट ने गुरुवार 29 फरवरी 2024 को सैयद अब्दुल करीम टुंडा को 1993 के सीरियल बम ब्लास्ट मामले में बरी कर दिया। टुंडा के खिलाफ शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन में हुए बम धमाके का मामला 2014 से विचाराधीन था।

क्या थी 1993 की ये आतंकी घटना?

यह घटना 6 दिसंबर 1993 को राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन में हुई थी। आतंकियों ने ट्रेन में सीरियल बम ब्लास्ट किया था। इस घटना को बाबरी मस्जिद विध्वंस की पहली बरसी का बदला करार दिया। इस केस में 17 आरोपी पकड़ में आए। इनमें से 3 (टुंडा, हमीदुद्दीन, इरफान अहमद) पर गुरुवार को फैसला सुनाया गया। बता दें कि हमीदुद्दीन को 10 जनवरी 2010, इरफान अहमद को 2010 के बाद और टुंडा को 10 जनवरी 2014, नेपाल बॉर्डर से गिरफतार किया गया था।

टुंडा हापुड़ जिले में बढ़ई का काम करता था

अब्दुल करीम टुंडा के बारे में बताया जाता है कि वो उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले का रहने वाला है। पिलखुवा में वो बढ़ई का काम करता था। अंदेशा जताया जाता है कि अब्दुल करीम टुंडा खुंखार आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैय्यबा से जुड़ा हुआ है। यह भी दावा किया जाता है कि टुंडा ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से दहशत फैलाने की ट्रेनिंग हासिल की है।

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