एक्शन मोड में भाजपा, चुनावी तस्वीर साफ… जोशी के बाद राठौड़-पूनियां को जिम्मेदारी…अब आगे क्या ?

लेख – नितेश सिंह

राजस्थान में सर्दियों के समय होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सियासत अभी से गर्म होने लगी है। आने वाले 8-9 महीने केवल और केवल राजनीति के नाम रहने वाले हैं। यूं तो हर कोई अपनी और अपनी पार्टी की जीत को लेकर आश्वस्त रहता है। लेकिन जिसने तैयारी अच्छी की और ग्राउंड जीरो पर काम किया, जीत उसी को नसीब होती है।

सोशल मैनेजमेंट…प्लानिंग और इम्प्लीमेंट
बात तैयारी की हो…तो भाजपा पूरी तरह एक्शन मोड में आ चुकी है। हालांकि भाजपा के लिए कहा भी जाता है कि ये पार्टी हमेशा चुनावी मोड में रहती है। यही कारण है कि पहले राजे और पूनियां विवाद को निपटाने के लिए सी.पी. जोशी के रूप में ब्राह्मण चेहरे को प्रदेशाध्यक्ष बनाया गया। तो अब राजपूत क्षत्रप राजेंद्र राठौड़ का प्रमोशन कर उप नेता प्रतिपक्ष से नेता प्रतिपक्ष बनाया गया है। जबकि जाटों के बड़े चेहरे सतीश पूनियां को उप नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। इससे ये तो साफ हो गया है कि मोदी और शाह ने पहले पूरी प्लानिंग की है,,और, अब उस प्लानिंग को इम्प्लीमेंट किया जा रहा है।

क्या ये राजे गुट की जीत और पूनियां गुट को झटका ?
पार्टी में पिछले काफी समय से चल रही खींचतान और पोस्टरबाजी के कारण एक तरह से भाजपा कार्यकर्ता बंटे हुए से नजर आ रहे थे। लेकिन बीते कुछ दिनों में भाजपा के फैसलों से कुछ हद तक इस खींचतान को खत्म करने की कोशिश की जा रही है। क्योंकि पूनियां के समर्थकों ने सोशल मीडिया हो या कोई अन्य कार्यक्रम…सभी जगह पूनियां को अगला मुख्यमंत्री बताना शुरू कर दिया था। तो इतना ही नहीं राजे और पूनियां के समर्थक सोशल मीडिया पर कई बार आमने सामने भी हो जाते थे। लेकिन पूनियां के उप नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद उनके समर्थक उतने कॉन्फिडेंट नजर नहीं आ रहे हैं। जितने उनके प्रदेशाध्यक्ष रहने के दौरान नजर आते थे। वहीं राजे खेमे के विधायकों और नेताओं का कॉन्फिडेंस अलग ही नजर आ रहा है। कई कार्यकर्ता तो इसे राजे खेमे की जीत और पूनियां गुट को झटका ही बता रहे हैं।

राजस्थान भाजपा में अब आगे क्या ?
भाजपा की ओर से जोशी, राठौड़ और पूनियां के पद तय किए जाने के बाद केवल एक चेहरा तय किया जाना बाकी रहता है,,और, वो है मुख्यमंत्री का चेहरा…हालांकि वसुंधरा राजे के समर्थकों ने तो ये मान लिया है कि राजे ही भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री फेस होंगी। लेकिन जिस तरह से मोदी-शाह ने पिछले कुछ विधानसभा चुनाव बिना सीएम फेस का ऐलान किए लड़े हैं,,और, ना केवल लड़े हैं, बल्कि जीते भी हैं। उन्हें देखते हुए तो यही लग रहा है कि राजस्थान में भी भाजपा मोदी के चेहरे पर ही चुनाव लड़ेगी,,और, यदि बहुमत मिलता है तो विधायक दल की बैठक में मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान किया जाएगा। हालांकि ये बात अलग है ये नाम भी आलाकमान की ओर से ही फाइनल किया जाएगा।

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